किसानों की उम्मीदों में क्यों शामिल है उमंग सिंघार का नाम
मध्य प्रदेश को कृषि प्रधान राज्य कहा जाता है। प्रदेश की अधिकांश आबादी आज भी खेती और खेती से जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है। जब भी मैं मध्य प्रदेश के किसी गांव में जाता हूँ, खेत की मेड़ पर बैठकर किसी किसान से बात करता हूँ या उसकी फसल, उसकी मेहनत और उसकी चिंताओं को सुनता हूँ, तब मुझे महसूस होता है कि राजनीति का सबसे बड़ा उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि जनसेवा है। मेरा प्रयास केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में किसानों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझने, उनकी आवाज़ को सड़क से सदन तक मजबूती से उठाने और उनके अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष करने का रहा है। मेरे लिए जनसेवा का सबसे बड़ा अर्थ किसानों के सम्मान, समृद्धि और आत्मविश्वास को मजबूत करना है। मेरे लिए किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ और विकास की सबसे मजबूत आधारशिला है।
किसान मेरे लिए केवल मतदाता नहीं, अन्नदाता हैं
मेरे लिए किसान केवल एक मतदाता नहीं, बल्कि इस देश और प्रदेश का अन्नदाता है। वह अपनी मेहनत, पसीने और संघर्ष से हर परिवार की थाली तक अन्न पहुँचाता है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है। इसी कारणवश मैं हमेशा मानता हूँ कि किसान का सम्मान, उसकी खुशहाली और उसके अधिकार किसी भी सरकार और जनप्रतिनिधि की सर्वोच्च प्राथमिकता होने चाहिए। यही सोच मेरी राजनीति का आधार रही है और इसी कारण मैंने हर परिस्थिति में किसानों भाइयों की समस्याओं को समझने, उनके बीच रहने और सड़क से लेकर सदन तक उनकी आवाज़ को पूरी मजबूती के साथ उठाने का प्रयास किया है। मेरा विश्वास है कि किसान का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है और उसकी समृद्धि ही मध्य प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव है।
सड़क से लेकर सदन तक किसानों की गूँज
नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद मैंने हमेशा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि किसानों के हितों से जुड़ा कोई भी मुद्दा अनसुना न रह जाए। मेरा मानना है कि लोकतंत्र में विपक्ष का सबसे बड़ा दायित्व जनता की पीड़ा को पूरी मजबूती के साथ सदन तक पहुँचाना और सरकार से जवाबदेही तय कराना है।
यही कारण है कि मैं किसानों से जुड़े प्रत्येक महत्वपूर्ण मुद्दें खाद और बीज की उपलब्धता, सिंचाई की समस्या, फसलों का उचित मूल्य, समय पर खरीद, फसल बीमा, प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान, मुआवजा और बढ़ते कर्ज़ के बोझ को लगातार विधानसभा में उठाता रहा हूँ।
जब किसी किसान की आत्महत्या की खबर सामने आती है, तो मैं उसे केवल एक घटना या आँकड़ा नहीं मानता। वह एक ऐसे परिवार का दर्द है, जिसने अपनी उम्मीदों का सहारा खो दिया। मुख्यमंत्री के गृहजिला उज्जैन सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों की आत्महत्या की घटनाएँ अत्यंत गंभीर चिंता का विषय हैं। ऐसे हर मामले में मैंने सरकार से यह प्रश्न उठाया है, क्या किसानों को समय पर सहायता मिली? क्या फसल नुकसान का उचित मुआवजा मिला? क्या कर्ज़ और आर्थिक संकट से उबारने के लिए प्रभावी प्रयास किए गए? मेरा मानना है कि इन प्रश्नों का उत्तर देना सरकार की जिम्मेदारी है।
मेरा विश्वास है कि अन्नदाता को न्याय, सम्मान और उसका अधिकार दिलाना विपक्ष का सबसे बड़ा दायित्व है, और मैं सड़क से लेकर सदन तक किसानों की आवाज़ बनकर उनके हितों के लिए निरंतर संघर्ष करता रहूँगा।
खेतों तक पहुँचकर समस्याएँ समझने का प्रयास
मेरा हमेशा से यह विश्वास रहा है कि किसान की वास्तविक समस्याओं को केवल सरकारी रिपोर्टों, फाइलों या बैठकों के माध्यम से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। इसके लिए खेतों तक पहुँचना, किसानों के बीच बैठना, उनकी फसल को अपनी आँखों से देखना और उनके दैनिक संघर्षों को करीब से महसूस करना आवश्यक है। जब मैं किसी गांव में जाकर किसान से बातचीत करता हूँ, तो मुझे केवल उसकी कृषि संबंधी समस्याएँ ही नहीं, बल्कि उसके परिवार की उम्मीदें, आर्थिक चुनौतियाँ और भविष्य की चिंताएँ भी समझने का अवसर मिलता है। यही कारण है कि मैं लगातार प्रदेश के विभिन्न गांवों और कृषि क्षेत्रों का दौरा करता हूँ। इन मुलाकातों से प्राप्त सुझाव और अनुभव मेरे लिए केवल जानकारी नहीं, बल्कि जनसेवा की दिशा तय करने का आधार होते हैं।
किसानों का विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी
जब कोई कृषक अपनी बात मुझ तक पहुँचाने आता है, तो मैं उसे केवल एक मुलाकात नहीं, बल्कि अपने प्रति व्यक्त किए गए विश्वास के रूप में देखता हूँ। यही विश्वास मुझे और अधिक संवेदनशीलता तथा जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है। मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि आज खेती का कार्य पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि इन चुनौतियों को केवल सुनकर छोड़ न दिया जाए, बल्कि उन्हें उचित मंचों पर प्रभावी ढंग से उठाया जाए और उनके समाधान के लिए निरंतर प्रयास किए जाएँ। मेरा मानना है कि जनप्रतिनिधि का दायित्व केवल नीतियों पर चर्चा करना नहीं, बल्कि उन लोगों की आवाज़ बनना है जिनकी मेहनत से प्रदेश की खुशहाली जुड़ी है। यही भावना मुझे हर परिस्थिति में खेती-किसानी से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहने और किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की शक्ति देती है।
निष्कर्ष
मैं स्वयं को आज भी सबसे पहले जनता का सेवक और कांग्रेस का एक साधारण कार्यकर्ता मानता हूँ। मुझे किसी पद से नहीं, बल्कि किसानों के विश्वास से शक्ति मिलती है। मैं आज फिर यह संकल्प दोहराता हूँ कि सत्ता में रहूँ या विपक्ष में, किसानों के सम्मान, उनके अधिकार और उनकी खुशहाली के लिए मेरा संघर्ष कभी नहीं रुकेगा। मैं सड़क से लेकर सदन तक और आवश्यकता पड़ी तो हर संवैधानिक मंच पर उनकी आवाज़ बनकर खड़ा रहूँगा। मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार कोई राजनीतिक पद नहीं, बल्कि किसान के चेहरे की मुस्कान और उसका विश्वास है। यही विश्वास मेरी ताकत है, यही मेरी प्रेरणा है और यही मेरी राजनीति का मूल उद्देश्य भी है।