लंबे इंतजार के बाद आखिरकार भोपाल का मास्टर प्लान सामने आ गया है। आपने और आपकी पार्टी ने भविष्य के भोपाल की जो तस्वीर पेश की, उससे ऐसा लगा मानो हमारी राजधानी का आने वाला कल विकास और निवास दोनों के लिहाज से बेहद शानदार होगा।
मध्यप्रदेश में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण के लिए भाजपा सेफ गेम खेल रही है। सांप भी मर जाए, लाठी भी न टूटे। मतलब आरक्षण भी न दे और नुकसान भी न उठाना पड़े। इसलिए मामला अदालतों और फाइलों में उलझा दिया है। जब भी सवाल पूछा जाता है, भाजपा जवाब देने की जगह कांग्रेस पर आरोप लगाने लगती है। मैं आज सीधा सवाल पूछना चाहता हूँ कि सात साल बीत गए, ओबीसी के युवाओं को उनका हक़ मिला क्यों नहीं?
सार्वजनिक जीवन और जन-प्रतिनिधित्व का एक अहम पहलू समाज के विभिन्न वर्गों से सीधे संवाद करना है। ऐसे ही संवादों के दौरान कई बार उन गुमनाम नायकों से मुलाकात हो जाती है, जिनकी अनसुनी कहानियां सत्ता में बैठे लोगों की बेरुखी और संवेदनहीनता की कड़वी सच्चाई उजागर कर देती हैं।
दिल्ली की तानाशाह सरकार का डर और घबराहट आज पूरे देश के सामने बेनकाब हो चुकी है। आज जो कुछ राजधानी दिल्ली में हो रहा है, उसने साबित कर दिया है कि केंद्र में बैठी सत्ता अब जनता के जनादेश से नहीं, बल्कि डर और तानाशाही के सहारे टिकी है। दिल्ली की सीमाओं को पूरी तरह सील कर देना, राजधानी की तरफ जाने वाली सभी ट्रेनों को बीच रास्ते में रोक देना, और उन ट्रेनों से चुन-चुनकर नौजवानों व युवाओं को उतार देना, यह किस बात का प्रतीक है? क्या यह एक लोकतांत्रिक देश की तस्वीर है या फिर किसी अघोषित आपातकाल की?
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई पर हाईकोर्ट के फैसले ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक न्याय से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है। अदालत ने वर्ष 2019 में अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने वाले कानून को असंवैधानिक मानते हुए निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही सरकारी भर्तियों में रोके गए 13 प्रतिशत पदों पर अनारक्षित वर्ग के पात्र अभ्यर्थियों को तीन महीने के भीतर नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल, जिसे राजा भोज की नगरी और झीलों के शहर के रूप में जाना जाता है, आज एक अजीबोगरीब प्रशासनिक विरोधाभास का सामना कर रही है। राजा भोज द्वारा 11वीं शताब्दी में निर्मित बड़ा तालाब केवल भोपालवासियों की प्यास ही नहीं बुझाता, बल्कि इसका सौंदर्य दशकों से लोगों को शहर में बसने के लिए आकर्षित करता रहा है। लेकिन इसी खूबसूरती का ख्वाब दिखाकर बीते दो दशकों में बिल्डरों ने नियमों को ताक पर रखकर कैचमेंट (जल ग्रहण) क्षेत्र में हजारों घर बेच दिए।
आज दिल्ली की सड़कों पर जो दिखा, वह केवल विरोध मार्च नहीं था, देश की आवाज़ थी। आज लोग महसूस करने लगे कि भाजपा उनके वोट पर डाका डाल रही है। जनता को लग रहा है कि उसके वोट का हक़ धीरे-धीरे छीना जा रहा है।
मध्य प्रदेश में पिछले दो दशकों से भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। सरकार द्वारा प्रदेश में बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल की हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। राज्य के प्रमुख सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में करोड़ों रुपये की आधुनिक मशीनें या तो छोटे-मोटे उपकरणों के अभाव में शो-पीस बनी हुई हैं या तकनीकी स्वीकृतियों के फेर में अटकी पड़ी हैं। इसका सीधा खामियाजा प्रदेश के गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
इंदौर की रेसीडेंसी कोठी में मैंने जो कहा, वह किसी राजनीतिक आरोप से कहीं ज़्यादा गंभीर है। भागीरथपुरा में जो हुआ, वह सिर्फ़ एक मोहल्ले की त्रासदी नहीं थी। वह इस बात का सबूत है कि जब सरकार अपनी नाकामी छिपाना चाहती है, तो वह जांच रिपोर्ट तक को दबाने से नहीं हिचकती।
लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन है और उनके मुद्दों को पूरी प्रखरता से उठाना ही राजनीति का असली उद्देश्य है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1885 से लेकर अपने 141 वर्षों के ऐतिहासिक सफर में हमेशा इसी मूल मंत्र का पालन किया है। 1885 से 1947 तक अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों से लोहा लेकर देश को आजाद कराने से लेकर आजादी के बाद की चुनौतियों का सामना करने तक, कांग्रेस ने जनता के भरोसे और प्यार को सर्वोपरि रखा है।
बचपन में भारतेंदु हरिश्चंद्र का नाटक "अंधेर नगरी" पढ़ा था, जहाँ टके सेर भाजी और टके सेर खाजा बिकता है और राजा इतना चौपट है कि न्याय के नाम पर तमाशा होता है। तब लगता था कि यह व्यंग्य है। आज मध्य प्रदेश को देखता हूँ तो लगता है कि वह नाटक नहीं, हमारे प्रदेश का दस्तावेज़ था।
किसी भी देश या प्रदेश की तरक्की उसके वर्कफोर्स (कार्यबल) पर निर्भर करती है। जिस राज्य की युवा आबादी जितनी ज्यादा हुनरमंद और रोजगारयुक्त होगी, उसकी अर्थव्यवस्था उतनी ही तेजी से आगे बढ़ेगी। मध्य प्रदेश की 7 करोड़ से अधिक आबादी में युवाओं का आंकड़ा 2 करोड़ के पार है। आज के इन 'जेन-जी' (Gen-Z) और 'जेन-अल्फा' (Gen-Alpha) युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी योग्यता के मुताबिक सम्मानजनक रोजगार पाने की है।
देश में विकास के बड़े-बड़े दावों और विज्ञापनों के बीच एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि जब-जब कोई बड़ी परियोजना आकार लेती है, उसकी सबसे बड़ी कीमत देश के मूल निवासी यानी आदिवासियों को चुकानी पड़ती है। केंद्र और राज्य की 'डबल इंजन' सरकारों के दौर में भाषणों के मंच से तो आदिवासियों को प्रकृति पूजक और आदरणीय कहकर सम्बोधित किया जाता है, लेकिन धरातल पर नीतियां उनके खिलाफ ही खड़ी नजर आती हैं।
पूरी बरसात खबरें आती रही हैं। कहीं पूल टूट गया, कहीं एयरपोर्ट टपक गया, कहीं सड़क धस गई। लेकिन अब हरदा से खबर आई कि करोड़ों की लागत से बन रहे लॉ कॉलेज की छत पहली बरसात में ही टपकने लगी और सरिये बाहर झांकने लगे।
मध्य प्रदेश में शिक्षक आज सड़क पर उतरने को मजबूर हैं, और इसकी पूरी जिम्मेदारी भाजपा सरकार की नीयत और नाकामी पर जाती है। करीब डेढ़ लाख सरकारी शिक्षकों का भविष्य शिक्षक पात्रता परीक्षा के जाल में उलझा दिया गया है, और सरकार महीनों से इस मसले पर सिर्फ टालमटोल करती आई है। नतीजा यह है कि अब शिक्षक संगठनों ने भोपाल के नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरना-अनशन का ऐलान कर दिया है।
24 सितंबर 2010 वह दिन है, जब मेरी बुआ जमुना देवी जी अपने संघर्ष की राजनीतिक विरासत सौंप कर विदा हुई थीं। मध्य प्रदेश की पहली महिला उपमुख्यमंत्री और आदिवासी समाज की मजबूत आवाज जमुना देवी को हमसे दूर हुए आज 16 वर्ष हो गए हैं, लेकिन समय के साथ उनकी याद कम नहीं हुई। आज आदिवासी समाज, गरीब, महिलाएं और वंचित लोग, परेशान नागरिक अपने अधिकारों की बात करते हैं, मुझे बुआ जी का संघर्ष याद आता है।
मोहन सरकार समझती है जनता को सरप्लस बिजली का मायना नहीं पता। सब जानते हैं सरप्लस का मतलब मांग से ज्यादा बिजली है। अब सवाल है कि सरप्लस है तो भोपाल के कई इलाकों में बिजली आती-जाती क्यों है। कई इलाकों में कम वोल्टेज की शिकायत है।
कुछ शामें कार्यक्रम की जगह दिल दिमाग़ पर याद बनकर छा जाती हैं। इंदौर में 19 सितंबर की शाम ऐसी ही एक शाम थी। कई हफ़्तों की उलझनों, तैयारियों, नेहरू स्टेडियम की अनुमति न मिलने, फिर जगह बदलने और तारीख़ आगे बढ़ने के बाद इंदौर के उस मैदान में पहुँचा, तो सामने भीड़ नहीं, वे युवा चेहरे थे जिनके पास सरकार से संघर्ष करने का जज्बा था और कुछ नया करने की उम्मीद थी।
19 सितंबर की शाम इंदौर के मैदान में खड़े होकर लगा कि प्रदेश की राजनीति ऐतिहासिक मोड़ पर आ गई है। जो लोग इसे एक और राजनीतिक आयोजन समझ रहे थे, उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि यह गूंज कितनी दूर तक जाएगी।
यह सरकार का नीतिगत यू-टर्न है। पहले लोगों को नकद छोड़कर डिजिटल भुगतान की आदत डलवाई गई, बैंकिंग व्यवस्था को कैशलेस बनाने का सपना दिखाया गया, और अब जब लोग उस आदत में ढल चुके हैं, तब चुपचाप उनकी जेब पर चार्ज थोपे जा रहे हैं।
समाज में आज भी "किन्नर" नाम को धब्बा समझा जाता है। लोग उन्हें देखकर सवाल करते हैं, दूरी बनाते हैं, ताने मारते हैं — लेकिन कोई यह नहीं समझता कि वो भी इसी समाज का हिस्सा हैं, वो भी इंसान हैं। सरकार की योजनाएँ हर वर्ग के लिए बनती हैं, लेकिन किन्नर समुदाय आज भी उनके बाहर खड़ा है — न नौकरी, न अवसर, न सम्मान।
सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भारतीय सेना में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इसमें एक नाम बहुत सम्मान से लिया जाता है — कर्नल सोफिया कुरैशी। उन्होंने अपने काम, अनुशासन और अपने संयम से पूरे देश का दिल जीता है।
पिछले कई दिनों से राज्य के अलग अलग हिस्सों से बुरी खबरें आ रहीं थीं — जैसे सागर के बंडा में जहरीली शराब पीने से करीब 28 लोगों की मौत, वो राज्य जहां के जूनियर डॉक्टरों को आज की महंगाई के दौर में अपना स्टाइपेंड 14 हजार से 30 हजार रुपए कराने के लिए राजधानी भोपाल में रात के अंधेरे में लाठियां खानी पड़ी हो,
गंधवानी विधानसभा परिवार में पिछले 17 सालों से चल रही श्री गणेश प्रतिमा वितरण की परंपरा आस्था, सेवा और सामुदायिकता के साथ बदस्तूर जारी है। सेवा सद्भाव, बुद्धि-विवेक और लोक मंगल के देवता श्री गणेश सबको अपना आशीर्वाद प्रदान करें।
मैं आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार से एक सीधा सवाल पूछना चाहता हूं कि आखिर आपको आदिवासी कोड से डर क्यों लगता है? यह सवाल किसी एक व्यक्ति का नहीं है।
मध्यप्रदेश में मंत्री विजय शाह से जुड़े एक गंभीर प्रकरण ने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली, संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और न्यायिक आदेशों के पालन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
नक्सल आंदोलन की शुरुआत 1967 के नक्सलबाड़ी किसान-आदिवासी विद्रोह से हुई थी, जिसमें भूमि-अधिकार और शोषण के सवाल प्रमुख थे, लेकिन बाद में इसका एक हिस्सा माओवादी विद्रोह में बदल गया। उस समय जमीन के मालिकाना हक, बंटाईदार किसानों के अधिकार और जमींदारी शोषण जैसे सवाल बेहद गंभीर थे। नक्सलबाड़ी से ही नक्सल आंदोलन का जन्म हुआ
हम प्रकृति के रक्षक हैं, सत्ता के दिखावे के मोहताज नहीं!
दतिया विधानसभा उपचुनाव का जनादेश एक सीट का चुनाव नतीजा नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की राजनीति में बदलाव की तेज होती आहट का इशारा है।
कांग्रेस के भीतर और बाहर, क्यों सुना जा रहा है उमंग सिंघार का नाम
विधानसभा में तेवर, जनता के बीच संवाद: उमंग सिंघार की अलग पहचान
ग्रामीण अंचलों में क्यों बढ़ रही है उमंग सिंघार के नेतृत्व की चर्चा
मध्य प्रदेश में विपक्ष की मजबूत आवाज़ से मुख्यमंत्री चेहरे तक का सफर
महंगाई, बेरोजगारी और किसानों के सवालों पर उमंग सिंघार की आवाज़
विधानसभा से सड़क तक: क्यों लोगों को दिख रहा है उमंग सिंघार में नेतृत्व
क्या संघर्ष की राजनीति उमंग सिंघार को मुख्यमंत्री की दौड़ में आगे ला रही है
मध्य प्रदेश की राजनीति में उमंग सिंघार को लेकर बढ़ती जनचर्चा
युवा कहते हैं: प्रदेश को चाहिए जमीन से जुड़ा नेतृत्व
किसानों की उम्मीदों में क्यों शामिल है उमंग सिंघार का नाम
मध्य प्रदेश को मजबूत विपक्ष मिला, अब क्या मिलेगा नया मुख्यमंत्री चेहरा!
कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पसंद क्यों बन रहे हैं उमंग सिंघार
आदिवासी अंचल से उठती आवाज़: अब नेतृत्व उमंग सिंघार जैसा चाहिए
युवाओं की चर्चा में क्यों हैं उमंग सिंघार का नाम
जनता पछू रही है : क्या उमंग सिघार ं बन सकते हैं मध्य प्रदेश के अगले मख्यमंत्री
मध्य प्रदेश में नई उम्मीद का नाम क्यों बन रहे हैं उमंग सिंघार?
सिंगरौली बिजली समझौता 25 साल, 1.25 लाख करोड़ और भाजपा-अडानी की 'जुगलबंदी'
मध्य प्रदेश में बढ़ती ड्रग तस्करी और संगठित अपराध के मामलों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को इंदौर में एक करोड़ रुपये का MD ड्रग्स पकड़ा गया, जिसने एक बार फिर राज्य में फैलते नशे के कारोबार को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
भारत में जब भी Adivasi Leader of India या Tribal Leader in India की बात होती है, तो विभिन्न राज्यों से कई प्रभावशाली नाम सामने आते हैं। इन नेताओं में Umang Singhar एक प्रमुख चेहरा हैं, जो मध्य प्रदेश की राजनीति में एक मजबूत आदिवासी नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं।
कांग्रेस के अनुसार, सिंगरौली में जो हो रहा है वह विकास नहीं, बल्कि कॉरपोरेट लूट है। यह केवल पर्यावरण विनाश नहीं, बल्कि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों, संस्कृति और भविष्य पर सीधा प्रहार है। ‘आदिवासी गौरव दिवस’ मनाने वाली भाजपा सरकार पर सबसे अधिक आदिवासी-विरोधी होने का आरोप लगाया गया है।
आज कांग्रेस की आदिवासी नेत्री जमुना देवी जी यानी हमारी 'बुआ जी' को हमसे बिछड़े 15 साल हो गए। इन डेढ़ दशक के अंतराल में कांग्रेस और आदिवासी समाज की स्थितियों में बहुत कुछ बदलाव आया। लेकिन, हर बदलाव के दौर में बुआ जी की कमी हमेशा खलती रही।
भारत एक ऐसा राष्ट्र है, जिसकी संस्कृति, परंपरा और आचार-विचार हमेशा शांति, संयम और सह-अस्तित्व के मूल्यों पर आधारित रही है। हमने हमेशा संवाद और समर्पण के रास्ते को वरीयता दी है। लेकिन इतिहास गवाह है कि पाकिस्तान ने बार-बार हमारी इस विनम्रता को कमजोरी समझकर धोखा दिया है और भारत की संप्रभुता पर चोट की है।
हमारी भारतीय वायुसेना और सेना ने जो साहस दिखाया है, उस पर हर भारतीय को गर्व है। ऑपरेशन सिंदूर के तहत 6-7 मई की मध्यरात्रि 1:00 बजे से 1:30 बजे के बीच भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंक के ठिकानों पर बड़ी और सटीक एयर स्ट्राइक की।
आखिरकार सरकार को जाति जनगणना कराने का निर्णय लेना पड़ा। यह राहुल गांधी जी के अथक संघर्ष और दृढ़ संकल्प की ऐतिहासिक जीत हुई ।यह निर्णय सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आज मध्यप्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित राजनीतिक मामलों की समिति (PAC) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में मैंने सहभागिता की। इस बैठक की अध्यक्षता हमारे प्रदेश प्रभारी श्री हरीश चौधरी जी ने की
भोपाल, 10 अप्रैल 2025: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक उमंग सिंघार ने एक बार फिर मध्य प्रदेश सरकार पर नर्सिंग घोटाले को लेकर निशाना साधा है।
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने हाल ही में विधानसभा की कार्यवाही का लाइव टेलीकास्ट (सीधा प्रसारण) करने की पुरज़ोर माँग की है।
आज टंट्या मामा के वंशज बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हो रहे हैं कार्यक्रम के बाद सभी लोगों ने सामूहिक रूप से सह भोज किया
यही विश्वास आपको दिखाना है, एक बार फिर पूर्ण बहुमत से कांग्रेस की सरकार बनाना है
दिलों में पनप रही सांप्रदायिक नफ़रत को *क़दमों की दूरी से ख़त्म किया राहुल गांधी जी ने - उमंग सिंघार*
गंधवानी मेरे जीवन का वो हिस्सा है जो मेरे हृदय में विराजमान है...
सक्रिय, समर्पित और सेवानिष्ठ नेता उमंग सिंघार
सशक्त, सामर्थ्यपूर्ण और विश्वसनीय नेता उमंग सिंघार
भारतीय समाज के लिए बाल मजदूरी एक अत्यंत चिंता का विषय है
भारतीय समाज के लिए कुपोषण एक गंभीर समस्या है
गंधवानी में कार्य करने के लिए इक्छुक डॉक्टर को अपने व्यय पर 1 लाख रुपए तक देने को तैयार हूं।
महत्वपूर्ण बात ये है कि उदयपुर घोषणापत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव से 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए आरक्षण लागू करेगी।