मध्य प्रदेश देश में बना ड्रग और संगठित अपराध की राजधानी, माफिया पर मेहरबान सरकार!
इंदौर से भोपाल तक करोड़ों के ड्रग्स बरामद, NCRB रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े
मध्य प्रदेश में बढ़ती ड्रग तस्करी और संगठित अपराध के मामलों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को इंदौर में एक करोड़ रुपये का MD ड्रग्स पकड़ा गया, जिसने एक बार फिर राज्य में फैलते नशे के कारोबार को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
NCRB की “Crime in India 2024” रिपोर्ट के अनुसार, देश में दर्ज ड्रग तस्करी के मामलों में से 60% मामले केवल मध्य प्रदेश से हैं। रिपोर्ट के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि राज्य ड्रग तस्करी के मामलों में देश के अन्य राज्यों से काफी आगे निकल चुका है।
रिपोर्ट के अनुसार, अगर आंध्र प्रदेश, बिहार, असम, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के आंकड़ों को जोड़ दिया जाए, तब भी वे मध्य प्रदेश के बराबर नहीं पहुंचते।
संगठित अपराध में भी मध्य प्रदेश सबसे ऊपर
ड्रग तस्करी ही नहीं, बल्कि संगठित अपराध के मामलों में भी मध्य प्रदेश देश में सबसे ऊपर बताया गया है। NCRB ने 2024 की रिपोर्ट में (BNS) के तहत संगठित अपराध का नया डेटा शामिल किया। इसके अनुसार, पूरे देश में दर्ज 840 संगठित अपराध मामलों में से 202 मामले अकेले मध्य प्रदेश में दर्ज हुए।
मंत्री ने उठाए सवाल, लेकिन कार्रवाई पर सवाल
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में ड्रग तस्करी को लेकर सवाल उठाए, फिर भी कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।
अक्टूबर 2024 में भोपाल में 1800 करोड़ रुपये का ड्रग पकड़ा गया। आरोपियों के भाजपा से जुड़े होने की बात सामने आई। इसके कुछ ही हफ्तों बाद भोपाल में 90 करोड़ रुपये का एक और ड्रग रैकेट पकड़ा गया।
इसी दौरान अक्टूबर 2024 में Directorate of Revenue Intelligence (DRI) ने झाबुआ जिले में मेफेड्रोन (synthetic drug) बनाने की एक अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया।
पुलिस और राजनीतिक संरक्षण के आरोप
इंदौर में जब एक पुलिस अधिकारी ने ड्रग रैकेट का खुलासा करते हुए कुछ पुलिसकर्मियों की संलिप्तता पर FIR दर्ज कार्रवाई की, तो उन्हें दंडात्मक पोस्टिंग पर भेज दिया गया।
भोपाल के चर्चित “मछली” कथित ड्रग रैकेट के तार भाजपा और उसके एक मंत्री से जुड़े बताए गए, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई।
हर दिन औसतन 13 मामले, 14 गिरफ्तारियां
आंकड़ों के अनुसार, 2021 से अब तक मध्य प्रदेश में हर दिन औसतन:
- 13 ड्रग से जुड़े मामले दर्ज हुए
- 14 गिरफ्तारियां हुईं
बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश ने ड्रग तस्करी के मामलों में पंजाब को भी पीछे छोड़ दिया है।
विधानसभा में गूंजा मुद्दा
बढ़ते ड्रग तस्करी के मामलों को लेकर कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा से वॉकआउट भी किया, क्योंकि सरकार का जवाब उन्हें संतोषजनक नहीं लगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं गृह विभाग संभाल रहे हैं। वे अपने मंत्रियों से प्रोग्रेस रिपोर्ट मांग रहे हैं, लेकिन उनके कार्यकाल में बढ़ती ड्रग तस्करी पर उनसे सवाल कौन करेगा?
आखिर जवाबदेह कौन?
सरकार का कहना है कि वह ड्रग नेटवर्क के खिलाफ लगातार कार्यवाही कर रही है। लेकिन सवाल यह है कि अगर कार्यवाही इतनी प्रभावी होती, तो दूसरे राज्यों की एजेंसियों को भोपाल आकर ऑपरेशन क्यों चलाने पड़ते?
सत्ता से जुड़े कुछ लोग संगठित तरीके से ड्रग तस्करी में शामिल हैं और सरकार उन्हें संरक्षण दे रही है।