क्या संघर्ष की राजनीति उमंग सिंघार को मुख्यमंत्री की दौड़ में आगे ला रही है
राजनीति में जनचर्चा अपने आप नहीं बनती, बल्कि वर्षों के संघर्ष, जनता के बीच लगातार मौजूदगी और जनहित के मुद्दों पर मजबूती से खड़े रहने से बनती है। मध्यप्रदेश की राजनीति में नेताप्रतिपक्ष उमंग सिंघार का बढ़ता जनाधार और मुखर भूमिका लगातार चर्चा में है। जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने, सरकार को जवाबदेह बनाने और कांग्रेस संगठन को सशक्त करने के प्रयासों ने सिंघार को प्रदेश की राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल कर दिया है। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि राजनीतिक गलियारों में उमंग सिंघार को मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरों में भी देखा जाने लगा है।
जनता के बीच रहना ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है
मैंने हमेशा यह कोशिश की है कि राजनीति केवल विधानसभा तक सीमित न रहे, चाहे प्रदेश के किसानों की समस्याएँ रही हों, आदिवासी समाज के अधिकारों की बात हो, युवाओं का भविष्य हो या महिलाओं की सुरक्षा की बात हो मैंने हर विषय पर जनता के बीच जाकर उनकी बात सुनी और उसे सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती से उठाया। मैंने हमेशा जनता के मुद्दों को अपनी प्राथमिकता बनाया है।
मेरा मानना है कि नेता वही है जो चुनाव के समय नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में जनता के साथ खड़ा रहें। इसलिए मैं आज भी गाँव-गाँव, शहर-शहर जाकर लोगों की बात सुनता हूँ और उनकी आवाज़ को विधानसभा तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ।
युवाओं के भविष्य की लड़ाई मेरी प्राथमिकता रही है
NEET परीक्षा विवाद के दौरान लाखों छात्रों के भविष्य और उनके विश्वास पर जब सवाल खड़े हुए, तब नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को केवल एक परीक्षा का विवाद नहीं, बल्कि युवाओं के अधिकारों और भविष्य का प्रश्न मान कर उन्होंने सड़क से लेकर सदन तक छात्रों की आवाज़ को मजबूती से उठाया और पारदर्शी एवं निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की मांग की। ऐसे अनेक जनहित के मुद्दों पर उनकी सक्रिय और संघर्षशील भूमिका ने सिंघार को केवल विपक्ष के मुखर नेता के रूप में ही नहीं, बल्कि जनता के हितों के लिए लगातार लड़ने वाले नेतृत्व के रूप में स्थापित कर दिया है। यही निरंतर जनसंघर्ष उन्हें मध्य प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदारों की चर्चा में भी प्रमुखता से आगे ला रहा है।
क्या मुख्यमंत्री पद ही राजनीति का अंतिम लक्ष्य है?
मुख्यमंत्री पद को लेकर मुझसे अक्सर सवाल पूछा जाता है। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि किसी भी लोकतांत्रिक दल में ऐसे निर्णय पार्टी नेतृत्व और संगठन तय करते हैं। मेरी राजनीति कभी किसी पद को लक्ष्य बनाकर नहीं रही। मेरे लिए सबसे बड़ा पद जनता का विश्वास है। यदि मैं मध्य प्रदेश के लोगों के दुख-दर्द में उनके साथ खड़ा रहूँ, उनकी आवाज़ बनूँ और उनके अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष करता रहूँ, तो यही मेरे राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। बाकी जिम्मेदारियाँ कब और कैसे मिलती हैं, यह समय, संगठन और जनता का विश्वास तय करता है।
जनचर्चा का आधार संघर्ष और विश्वास
यदि आज मध्य प्रदेश की राजनीति में मेरे नाम को लेकर चर्चा हो रही है, तो उसका कारण किसी पद की आकांक्षा नहीं, बल्कि जनता के बीच मेरा निरंतर सक्रिय रहना और उनके मुद्दों के लिए लगातार संघर्ष करना है। जनता यह देखती है कि कौन उनके सुख-दुख में साथ खड़ा है, कौन विधानसभा में उनकी आवाज़ बुलंद करता है और कौन हर परिस्थिति में उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ता है। यदि मेरे काम और संघर्ष के आधार पर लोग मुझे भविष्य के नेतृत्व की संभावनाओं से जोड़कर देखते हैं, तो मैं इसे सम्मान से अधिक एक बड़ी जिम्मेदारी मानता हूँ। मेरा प्रयास हमेशा यही रहेगा कि जनता के विश्वास पर खरा उतरूँ और मध्य प्रदेश के विकास एवं कांग्रेस की विचारधारा को मजबूती देने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करता रहूँ।
निष्कर्ष
मेरे लिए राजनीति कभी किसी पद तक पहुँचने का माध्यम नहीं रही, बल्कि जनता के विश्वास और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने की जिम्मेदारी रही है। मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका निर्णय पार्टी नेतृत्व, संगठन और समय करेगा। मेरा संकल्प आज भी वही है जो राजनीति में आने के पहले दिन था,मध्य प्रदेश के किसानों, युवाओं, महिलाओं, आदिवासी समाज, पिछड़े वर्ग और हर नागरिक के अधिकारों के लिए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से संघर्ष करना। यदि मेरे इस संघर्ष के कारण जनता मुझ पर विश्वास जताती है और मेरे नाम को भविष्य की जिम्मेदारियों से जोड़कर देखती है, तो मैं इसे किसी उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि और अधिक समर्पण के साथ काम करने की प्रेरणा मानता हूँ। मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान कोई पद नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की जनता का विश्वास है।
मध्य प्रदेश की जनता मेरी ताकत है और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मेरी पहचान हैं