सिंगरौली में जंगलों की खुली लूट: 800 पुलिसकर्मियों के साये में अडानी–भाजपा का कॉरपोरेट हमला
आदिवासियों की ज़मीन, जंगल और भविष्य को कोयले के काले रंग में रंगने की साज़िश, कांग्रेस फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने उजागर किया सिंगरौली का कड़वा सच
सिंगरौली के जंगलों में आज 800 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती है सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि सच्चाई छुपाने के लिए।
लेकिन सच को दबाया नहीं जा सकता। कटे हुए पेड़, कच्चे रास्ते और जंगलों में चल रही मशीनें साफ़ बता रही हैं कि सिंगरौली में क्या हो रहा है।
अडानी और भाजपा सरकार की मिलीभगत में आदिवासियों की खेती, घर, दीवारें और भविष्य को कोयले के काले रंग में रंग दिया गया है। जिस मिट्टी से आदिवासियों का जीवन चलता था, वही मिट्टी आज उनकी आँखों के सामने छीनी जा रही है।
यह संघर्ष किसी बड़े साम्राज्य या मुनाफे का नहीं है
यह उन आदिवासी महिलाओ का संघर्ष है, जिन्हे अपने बच्चों के लिए बस एक स्कूल और दो वक्त की रोटी चाहिए।
लेकिन मोदी–अडानी गठजोड़ ने उनसे यही मूल अधिकार छीन लिया।
जिस तेंदूपत्ते से आदिवासी माताएँ-बहनें अपनी रोज़ी-रोटी कमाती थीं, उन्हीं पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी गई। यह सिर्फ जंगलों की कटाई नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, परंपरा और अस्तित्व पर सीधा हमला है।
जमीनी हकीकत:
कांग्रेस की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी के साथ सिंगरौली की देवसर विधानसभा के गजरा बहरा गांव का दौरा किया।
यहाँ अडानी कोल यार्ड और NTPC–कोल इंडिया की खदानों के कारण भीषण प्रदूषण ज़मीन अधिग्रहण का दबाव आदिवासी परिवारों का विस्थापन गंभीर स्वास्थ्य संकट मजबूरी में पलायन हजारों परिवारों की ज़िंदगी तबाह हो रही है।
कागज़ों पर सहमति दिखाई जा रही है, लेकिन हकीकत में धमकाकर दस्तख़त करवाए जा रहे हैं। पुलिस की दीवार इसलिए खड़ी की गई ताकि यह सच बाहर न आए।
विधानसभा में भी सरकार बेनकाब
विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस ने सिंगरौली में 6 लाख पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाया।
इस पर वन राज्य मंत्री कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।
सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस विधायक दल ने 6 लाख पेड़ों की कटाई का पुरजोर विरोध कर सदन से वाकआउट किया
PESA एक्ट को लेकर भी सरकार ने सदन में गलत जानकारी दी, जबकि अगस्त 2023 में खुद सरकार मान चुकी है कि सिंगरौली का यह क्षेत्र PESA के अंतर्गत आता है।
एक ओर प्रधानमंत्री ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान चलाते हैं, दूसरी ओर सिंगरौली में जंगलों का सफाया यह भाजपा का दोहरा चरित्र है।
निष्कर्ष
सिंगरौली में जो हो रहा है, वह विकास नहीं बल्कि कॉरपोरेट लूट है।
यह केवल पर्यावरण विनाश नहीं, बल्कि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों, संस्कृति और भविष्य की हत्या है।
‘आदिवासी गौरव दिवस’ मनाने वाली भाजपा सरकार ही सबसे ज़्यादा आदिवासी विरोधी साबित हो रही है।
- सिंगरौली में जंगल कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए
- आदिवासियों की ज़मीन, जंगल और आजीविका की संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित हो
- दोषी अधिकारियों और कंपनियों पर सख्त कार्रवाई हो
- प्रभावित गांवों को तुरंत राहत, पुनर्वास और मुआवज़ा मिले
- कांग्रेस आदिवासी अधिकारों की इस लड़ाई को पूरी ताकत से लड़ेगी।
मैं, उमंग सिंघार, अपने आदिवासी भाई-बहनों के साथ हर परिस्थिति में खड़ा रहूँगा यह मेरा वादा है