दतिया ने बता दिया, जनता का भरोसा भाजपा से उठ चुका!
भाजपा हार के बहाने तलाशने में व्यस्त
दतिया विधानसभा उपचुनाव का जनादेश एक सीट का चुनाव नतीजा नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की राजनीति में बदलाव की तेज होती आहट का इशारा है। यह संदेश सिर्फ दतिया के लिए नहीं, पूरे प्रदेश के लिए है। लेकिन, अफसोस इस बात का है कि भारतीय जनता पार्टी आज भी जनता के इस स्पष्ट संदेश को समझने के बजाय अपनी हार के बहाने तलाश रही है। कोई भितरघात की बात कर रहा है, कोई संगठन पर सवाल उठा रहा है और कोई डॉ नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को दोषी ठहरा रहा है। भाजपा जितना चाहे आत्ममंथन कर ले, लेकिन जब तक वह कांग्रेस की जीत के कारण नहीं समझेगी, तब तक उसकी हार का सच भी नहीं समझ पाएगी।
कांग्रेस की जीत का असली कारण
सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इसलिए जीती, क्योंकि भाजपा में कथित सेबोटाज हुआ? बिल्कुल नहीं। कांग्रेस इसलिए जीती क्योंकि उसने जनता का विश्वास जीता। कांग्रेस इसलिए जीती क्योंकि उसका हर कार्यकर्ता एक लक्ष्य लेकर मैदान में उतरा था। कांग्रेस इसलिए जीती क्योंकि जनता बदलाव चाहती थी। भाजपा अपनी सुविधा के अनुसार कहानी गढ़ सकती है, लेकिन सच्चाई यह है कि दतिया की जनता ने भाजपा के अहंकार, झूठे दावों और जनविरोधी नीतियों को नकार दिया।
किसान, युवा, महिलाएं — हर तबका परेशान
आज प्रदेश का किसान परेशान है, नौजवान बेरोजगार है, महिलाएं महंगाई से त्रस्त हैं और आम आदमी भ्रष्टाचार से दुखी। मध्यप्रदेश सरकार हर मोर्चे पर असफल साबित हुई। सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे, प्रशासन जनता से दूर होता जा रहा है और विकास के नाम पर केवल झूठा प्रचार किया जा रहा। जनता सब देख रही है और अब उसका धैर्य जवाब दे चुका। दतिया का परिणाम उसी जनआक्रोश का लोकतांत्रिक जवाब है।
युवाओं ने दिया सबसे बड़ा संदेश
सबसे बड़ा संदेश प्रदेश के युवाओं ने दिया। भाजपा ने युवाओं को सपने दिखाए, लेकिन रोजगार नहीं दिया। परीक्षाओं पर सवाल उठे, भर्ती प्रक्रियाओं पर अविश्वास बढ़ा और भविष्य को लेकर निराशा गहराती गई। अब वही युवा भाजपा से जवाब मांग रहा है। यही कारण है कि प्रदेश का युवा तेजी से कांग्रेस के साथ खड़ा हो रहा है। वह समझ चुका, कि देश और प्रदेश को नई सोच, नई राजनीति और जवाबदेह नेतृत्व की जरूरत है।
अजेय होने का भ्रम टूटा
भाजपा यह भ्रम पालकर बैठी थी, कि वह अजेय है। लेकिन, पहले विजयपुर और अब दतिया ने उसका यह भ्रम चकनाचूर कर दिया। लगातार दो उपचुनावों में जनता ने स्पष्ट कर दिया कि सत्ता का अहंकार लोकतंत्र से बड़ा नहीं होता। जनता जब फैसला करती है, तो सबसे मजबूत समझी जाने वाली सरकारों की नींव भी हिल जाती है।
राहुल गांधी की भरोसे की राजनीति
राहुल गांधी जी लगातार देश की आवाज बनकर युवाओं, किसानों, मजदूरों, आदिवासियों, दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी राजनीति नफरत की नहीं, भरोसे की राजनीति है। यही कारण है कि देश का युवा उनके साथ खड़ा हो रहा। दतिया का जनादेश भी इसी बदलते राजनीतिक विश्वास की अभिव्यक्ति है। यह केवल कांग्रेस की जीत नहीं, बल्कि जनविश्वास की जीत है।
भाजपा नेताओं से सीधा सवाल
मैं भाजपा के नेताओं से कहना चाहता हूं कि अगर सचमुच जनता का संदेश समझना चाहते हैं, तो अपनी हार का दोष किसी नेता, किसी कार्यकर्ता या किसी गुट पर मत डालिए। एक बार जनता की आंखों में आंख डालकर पूछिए कि उसने आपको क्यों नकारा! जवाब मिल जाएगा। जनता अब झूठे वादों से नहीं, अपने जीवन में बदलाव चाहती है। उसे संवेदनशील सरकार चाहिए, जवाबदेह व्यवस्था चाहिए और ईमानदार नेतृत्व चाहिए।
आने वाले समय की दस्तक
दतिया ने साफ कर दिया है कि अब मध्यप्रदेश की राजनीति बदल रही है। जनता बदलाव का मन बना चुकी है। भाजपा के खोखले दावे, झूठे प्रचार और सत्ता का अहंकार अब ज्यादा दिनों तक नहीं चलने वाला। यह सिर्फ एक उपचुनाव का परिणाम नहीं, बल्कि आने वाले समय की दस्तक है। आज दतिया बोला है, कल पूरा मध्यप्रदेश बोलेगा। कांग्रेस का संघर्ष जनता के विश्वास का संघर्ष है और हमें पूरा भरोसा है कि यह विश्वास आने वाले हर चुनाव में और मजबूत होकर सामने आएगा।
(लेखक मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं)