जिन्होंने लगाई जान की बाजी, सरकार उन्हीं की सुध लेने को नहीं राजी: साढ़े 4 साल से बेरोजगार दर-दर भटक रहे मध्य प्रदेश के कोविड योद्धा
गुमनाम नायकों से मुलाकात
सार्वजनिक जीवन और जन-प्रतिनिधित्व का एक अहम पहलू समाज के विभिन्न वर्गों से सीधे संवाद करना है। ऐसे ही संवादों के दौरान कई बार उन गुमनाम नायकों से मुलाकात हो जाती है, जिनकी अनसुनी कहानियां सत्ता में बैठे लोगों की बेरुखी और संवेदनहीनता की कड़वी सच्चाई उजागर कर देती हैं।
हाल ही में मध्य प्रदेश के ऐसे ही जांबाज कोविड योद्धाओं (Corona Warriors) से मुलाकात हुई, जो कभी अपनी जान की बाजी लगाकर प्रदेशवासियों की सांसें बचा रहे थे, लेकिन आज अपने भविष्य और करियर के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
तब 'तारीफ और ताली', अब साढ़े 4 साल से बेरोजगारी
मार्च 2020 से मई 2023 का वह भयावह दौर कोई कैसे भूल सकता है, जब देश और दुनिया के साथ-साथ पूरा मध्य प्रदेश भी थमा हुआ था। जब लोग महामारी के डर से घरों में कैद थे और सोशल डिस्टेंसिंग ही जीवन का मूलमंत्र बन चुकी थी, तब प्रदेश के 4,000 से अधिक कोविड योद्धाओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर मोर्चा संभाला था।
इनमें डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, आशा कार्यकर्ता, सफाई कर्मचारी और पुलिसकर्मी शामिल थे, जिन्होंने सबसे विकट परिस्थितियों में सेवाएं दीं।
- 1,300 से ज्यादा साथियों की शहादत: फर्ज निभाते-निभाते 1,300 से ज्यादा कर्मचारियों ने अपनी जान गंवा दी। उनके परिवारों को सिर्फ आश्वासनों के दिलासे मिले।
- जो बचे, वो बेरोजगार हुए: जो योद्धा महामारी में खुद को बचाते हुए दूसरों का जीवन बचा गए, पूर्ववर्ती शिवराज सरकार ने 'बजट और फंड की कमी' का हवाला देकर उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। नतीजे के तौर पर ये योद्धा साढ़े चार साल से अधिक समय से बेरोजगार हैं।
कम वेतन में सेवा, बदले में वादाखिलाफी
महामारी के दौरान जब सरकार पर काढ़ा वितरण, जरूरी दवाओं की कालाबाजारी, टेंडर और ठेकों में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप लग रहे थे, तब भी ये कोविड योद्धा बेहद कम मानदेय में अपनी निष्ठा से जनता की सेवा करते रहे। लेकिन संकट टलते ही सरकार ने इन्हें दूध में से मक्खी की तरह निकालकर बाहर फेंक दिया।
'सेवा संकल्प' के नारों के बीच सुध कब लेगी सरकार?
एक तरफ भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 'सेवा संकल्प अभियान' और 'सेवा ज्योति यात्रा' जैसे बड़े-बड़े आयोजन कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जिन्होंने विषम परिस्थितियों में निष्काम भाव से जनता की सच्ची 'सेवा' की, उनके भविष्य पर अनिश्चितता का अंधेरा छाया हुआ है।
अब जब प्रदेश में नई सरकार को भी समय हो चुका है और 'डबल इंजन' का दावा किया जाता है, तो सवाल उठता है कि इन स्वास्थ्यकर्मियों की सेवाएं क्यों बहाल नहीं की जा रही हैं?
सच्चा सेवा संकल्प: योद्धाओं को लौटाएं नौकरी
सच्चा 'सेवा संकल्प' अभियानों और आयोजनों में नहीं, बल्कि उन योद्धाओं को उनका हक और नौकरी वापस देने में सिद्ध होगा। सरकार को तुरंत संवेदनशीलता दिखाते हुए इन सभी कोविड योद्धाओं को पुनर्नियोजित कर उनकी सेवाएं बहाल करनी चाहिए।