पहली बरसात में टपक गया "विकास": मध्यप्रदेश में इतना भ्रष्टाचार कैसे?
हरदा से आई एक और शर्मनाक खबर
पूरी बरसात खबरें आती रही हैं। कहीं पूल टूट गया, कहीं एयरपोर्ट टपक गया, कहीं सड़क धस गई। लेकिन अब हरदा से खबर आई कि करोड़ों की लागत से बन रहे लॉ कॉलेज की छत पहली बरसात में ही टपकने लगी और सरिये बाहर झांकने लगे।
मुझे हैरानी नहीं हुई क्योंकि यह हरदा की कहानी नहीं, पूरे मध्यप्रदेश की कहानी है। जो इमारत छात्रों के भविष्य की नींव बननी थी, वह शुरू होने से पहले ही खंडहर में बदल गई। दीवार की जुड़ाई में पत्थर के टुकड़े, जगह-जगह टूटी टाइल्स। इस भ्रष्टाचार में विभाग, मंत्री और सरकार क्या कर रहे हैं? इंजीनियर क्या कर रहे हैं? क्या भाजपा ने सब कुछ रामभरोसे छोड़ दिया है, भाजपा के शासन में यह जनता के पैसे की लूट है।
एसडीएम दफ्तर में भी दरारें
यह मप्र का अकेला मामला नहीं है। उसी हरदा में तवा कॉलोनी में सवा करोड़ की लागत से बना नया एसडीएम कार्यालय साल भर में ही आठ इंच चौड़ी दरारों से भर गया। जिस इमारत में बैठकर अधिकारी जनता की फरियाद सुनते हैं, वही इमारत आज खुद भ्रष्टाचार की शिकार बन गई है।
भोपाल का पीएम आवास प्रोजेक्ट
राजधानी भोपाल में 247 करोड़ रुपये के पीएम आवास प्रोजेक्ट का हाल देखिए — आठ महीने के भीतर प्लास्टर गिरने लगा, दीवारों से पानी रिसने लगा। जिस गरीब को सरकार पक्की छत का सपना बेचती है, उसे मिल रही है कमजोर छत जिसके नीचे वह कैसे सुरक्षित महसूस करे।
छतरपुर विश्वविद्यालय: जानबूझकर अनदेखी
छतरपुर में विश्वविद्यालय भवन बने तीन साल नहीं हुए कि दीवारों से सीमेंट झड़ने लगा, दरारें नजर आने लगीं। रिपोर्टों के अनुसार निर्माण के दौरान ही दरारों पर सवाल उठे थे, फिर भी बिना सुधार के भवन को हैंडओवर कर लिया गया। यानी गड़बड़ी छुपाई नहीं गई, जानबूझकर अनदेखी गई।
ये भाजपा के विकास में भ्रष्टाचार की दरारें हैं।
ग्वालियर: सड़क के सारे सैंपल फेल
ग्वालियर की चेतकपुरी सड़क का मामला तो हाई कोर्ट तक पहुंचा। वहां लैब जांच में सड़क के सारे सैंपल फेल हो गए। कोर्ट में हुई वीडियोग्राफी में बोरी से बंधे पाइप और मलबे-पत्थरों से बनी सड़क तक दिखी। सोचिए, अगर अदालत दखल न देती तो यह सच्चाई सामने नहीं आती?
बैतूल के 306 जर्जर स्कूल
बैतूल, जहां 306 सरकारी स्कूल भवन जर्जर घोषित हो चुके हैं, फिर भी उनका ध्वस्तीकरण तक शुरू नहीं किया गया। बारिश में हमारे बच्चे उन्हीं टूटी तपकती छतों और दरकती दीवारों के बीच बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। यह किस तरह का शासन है, जो अपने बच्चों और अपने नागरिकों की जान से समझौता कर रहा है?
क्या भाजपा वाकई देशभक्त है?
मैं पूछना चाहता हूं क्या भारतीय जनता पार्टी वाकई देशभक्त है, या यह निर्माण कार्यों की, विकास की, जनता के भरोसे की देशद्रोही है? सड़क बने तो घटिया, अस्पताल बने तो अधूरा, स्कूल बने तो जर्जर, कॉलेज बने तो छत टपकती है। आखिर यह भ्रष्टाचार इतनी बेशर्मी से कैसे चल रहा है?
जवाबदेही नदारद
सरकार के पास जवाबदेही नहीं है। हरदा में पीआईयू के अधिकारी और इंजीनियर खुद कबूल कर रहे हैं कि गड़बड़ी की जानकारी उन्हें मीडिया से मिली।
यह हद है कि जिन अफसरों को रोज साइट पर जाकर जांचना था, वे फाइलों में दस्तखत करते रहे और ठेकेदार को भुगतान होता रहा। यह सांठगांठ भाजपा के देशभक्त होने के नारे की धज्जियाँ उखेड़ती है। भाजपा को पता होना चाहिए विकास और भ्रष्टाचार एक साथ नहीं चलते। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार हर स्तर पर है — ठेकेदार से इंजीनियर तक, इंजीनियर से सत्ता तक। कमीशन पहले तय होता है, सीमेंट-सरिया बाद में बचता है।
सरकार से सीधे सवाल
मैं मध्यप्रदेश सरकार से पूछता हूं — अब तक कितने ठेकेदार ब्लैकलिस्ट हुए? कितने इंजीनियरों और अफसरों पर कार्रवाई हुई? जिन भवनों में गड़बड़ी साबित हुई, उनके निर्माण की निगरानी करने वालों से वसूली क्यों नहीं की गई? क्या सरकार हर घटिया निर्माण की जांच करेगी?
विकास जनता के पैसे से जनता के लिए होता है। लेकिन यह सरकार ठेकेदारों की तिजोरी भरने के लिए विकास कर रही है।
सरकार मंच से "डबल इंजन विकास" का दावा करती है, उसे यह बताना होगा कि उसका इंजन सड़कों को कुचल रहा है या बना रहा है।