ओबीसी आरक्षण पर सरकार की लापरवाही, 27% हक की लड़ाई में ऐसी चूक क्यों?
भाषणों में आसान, अदालत में मुश्किल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी, ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण दिलाने की बात भाषणों में करना आसान है, लेकिन उसके लिए अदालत में मजबूती से लड़ना सरकार की जिम्मेदारी है। जब मामला लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा है, तो आपकी सरकार की कानूनी तैयारी में इतनी खामियां क्यों सामने आईं?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एसएलपी पर सवाल
जबलपुर हाई कोर्ट द्वारा वर्ष 2019 के आरक्षण कानून को असंवैधानिक घोषित किए जाने के खिलाफ आपकी सरकार ने 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की। इस याचिका में सामने आई बताई गई दस खामियां सरकार की तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
याचिका में बताई गई दस खामियां
- कवर पेज और तारीखों में गड़बड़ी: कवर पेज, पृष्ठ संख्या 162 और इंडेक्स में दर्ज तारीखों के बीच विसंगति।
- पृष्ठों की गलत नंबरिंग: याचिका के पन्नों की नंबरिंग निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं होने की आपत्ति।
- न्यायाधीश के नाम और पन्नों के क्रम में कमी: याचिका में न्यायाधीश का नाम दर्ज नहीं होने और पृष्ठों का क्रम गड़बड़ होने का उल्लेख।
- पृष्ठ 11 से 13 तक दस्तावेज अस्पष्ट: कुछ दस्तावेज साफ नहीं होने तथा अंडरलाइन और वाटरमार्क से जुड़ी कमियां।
- रंगीन प्रतियों और दस्तावेजी सेट में त्रुटि: रंगीन जानकारी वाले पन्नों की प्रतियों और आवश्यक दस्तावेजों के सेट तैयार करने में कमी।
- पृष्ठ 18 पर तारीख का मेल नहीं: इस पृष्ठ पर दर्ज तारीख का अन्य दस्तावेजों की तारीखों से मेल नहीं खाने की आपत्ति।
- पन्नों के क्रम में गड़बड़ी: याचिका के कई पृष्ठों की क्रमबद्धता में त्रुटियां।
- पृष्ठ 392 और 393 अस्पष्ट: इन पन्नों की सामग्री साफ दिखाई नहीं देने की आपत्ति।
- वकालतनामे में कमियां: प्रमाणन से संबंधित शब्दों और अन्य याचिकाकर्ताओं के हस्ताक्षरों में कथित त्रुटियां।
- राहत मांगने वाले हिस्से में अतिरिक्त जानकारी: एसएलपी में अदालत से मांगी गई राहत के हिस्से में अतिरिक्त विवरण शामिल होने पर उसे हटाने का निर्देश दिए जाने का उल्लेख।
जवाबदेही कौन लेगा?
मुख्यमंत्री जी, ये छोटी-मोटी औपचारिकताओं का सवाल नहीं है। यह ओबीसी वर्ग के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुकदमा है। कानून विभाग की जिम्मेदारी आपके पास है, तो इन खामियों की जवाबदेही कौन लेगा?
हमारी मांग: मजबूत कानूनी पैरवी
मैं मांग करता हूं कि सभी आपत्तियों की समीक्षा कर जिम्मेदारी तय की जाए, जरूरत पड़ने पर अनुभवी अधिवक्ताओं को शामिल किया जाए और कानूनी कमियां तत्काल दूर की जाएं।
ओबीसी युवाओं को भाषण नहीं, 27% आरक्षण के लिए मजबूत कानूनी पैरवी चाहिए। सरकार बताए कि इतनी खामियां क्यों सामने आईं और अब उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।