अंधेर नगरी, चौपट राजा: अब गधे के नाम पर भी नर्सिंग सर्टिफिकेट!
भारतेंदु का व्यंग्य, या प्रदेश का दस्तावेज़?
बचपन में भारतेंदु हरिश्चंद्र का नाटक "अंधेर नगरी" पढ़ा था, जहाँ टके सेर भाजी और टके सेर खाजा बिकता है और राजा इतना चौपट है कि न्याय के नाम पर तमाशा होता है। तब लगता था कि यह व्यंग्य है। आज मध्य प्रदेश को देखता हूँ तो लगता है कि वह नाटक नहीं, हमारे प्रदेश का दस्तावेज़ था।
"Donkey" के नाम से नर्सिंग सर्टिफिकेट जारी
ताज़ा मामला सुनिए। मध्य प्रदेश नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल के ऑनलाइन पोर्टल पर "Donkey" यानी गधे के नाम से आवेदन किया गया और अस्थायी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र जारी भी हो गया। सोचिए, जिस पोर्टल को "डिजिटल सत्यापन" का नमूना बताकर प्रचारित किया जाता है, वह एक गधे को नर्स मान बैठा। यह हँसकर टाल देने वाला किस्सा नहीं है। यह उस सरकार का आईना है जिसने हर चीज़ को मज़ाक बना दिया है।
यह सिर्फ़ एक सर्टिफिकेट का सवाल नहीं है
नर्स वह इंसान है जो रात के तीन बजे अस्पताल के वार्ड में आपके बीमार बच्चे, माँ या पिता के पास खड़ी होती है। इंजेक्शन की मात्रा, दवा का समय और मरीज़ की नब्ज़ उसके हाथ में होती है। ऐसे पेशे के रजिस्ट्रेशन में अगर कोई भी, कैसा भी नाम डालकर प्रमाणपत्र निकाल ले, तो सवाल सिर्फ़ तकनीकी चूक का नहीं रह जाता। सवाल यह है कि क्या हमारे प्रदेश में मरीज़ की जान की कोई क़ीमत बची है?
अगर गधे के नाम से प्रमाणपत्र बन सकता है, तो असली फ़र्ज़ी डिग्रियों वाले कितने लोग सिस्टम में घुस चुके होंगे, इसका जवाब कौन देगा? जाँच होनी चाहिए कि इस पोर्टल पर अब तक कितने प्रमाणपत्र बिना ठोस सत्यापन के जारी हुए। और यह भी कि इसकी ज़िम्मेदारी किसकी है।
हर विभाग में एक ही कहानी
यह कोई इकलौती घटना नहीं है। भर्ती परीक्षाओं की गड़बड़ियाँ हों, सरकारी दफ़्तरों में बिना रिश्वत के फ़ाइल न हिलना हो या योजनाओं में घोटाले, प्रदेश ने पिछले वर्षों में बार-बार देखा है कि जवाबदेही नाम की चीज़ इस सरकार की डिक्शनरी से ग़ायब है। हर बार वही होता है: कुछ दिन शोर, फिर एक छोटे कर्मचारी पर कार्रवाई की खानापूर्ति, और असली ज़िम्मेदार फिर कुर्सी पर। जनता पूछती है कि कोई तो बड़ा नाम पकड़ा जाए, पर सवाल हवा में टँगा रह जाता है।
आख़िर भाजपा के नेता कर क्या रहे हैं?
मैं भाजपा के नेताओं से सीधा पूछना चाहता हूँ। क्या आपने यह मान लिया है कि जाने की बारी आ गई है, इसलिए "लूट सको तो लूट"? क्या बहती गंगा में हाथ धोने की होड़ लग गई है? प्रदेश की जनता ने आपको विश्वास दिया था, ताकि आप उसकी सेवा करें, सिस्टम को मज़बूत करें। लेकिन आपके राज में सिस्टम इतना खोखला हो गया है कि गधा भी नर्स बन जाए।
जब शासन में डर न हो, जवाबदेही न हो और ऊपर से संरक्षण मिलता हो, तब ऐसी "अंधेरगर्दी" स्वाभाविक है। जिस सरकार को प्रचार, इवेंट और उद्घाटन से फ़ुर्सत नहीं, उससे यह उम्मीद करना कि वह पोर्टल की सुरक्षा और सत्यापन पर ध्यान देगी, शायद ज़्यादती है।
हमारी माँगें
कांग्रेस पार्टी की ओर से हमारी स्पष्ट माँगें हैं:
- इस पूरे मामले की समयबद्ध और निष्पक्ष जाँच हो, और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल के अब तक जारी सभी ऑनलाइन प्रमाणपत्रों का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
- ज़िम्मेदार अधिकारियों पर सिर्फ़ औपचारिक नहीं, कठोर कार्रवाई हो। सरकार बताए कि ऑनलाइन सत्यापन के नाम पर जनता के पैसे से जो सिस्टम खड़े किए गए, वे किस काम के हैं।
जनता जवाब माँगेगी
भारतेंदु के नाटक का अंत याद है? चौपट राजा अपने ही बनाए जाल में फँसता है। मध्य प्रदेश की जनता भी सब देख रही है। आज वह मुस्कुराकर इस ख़बर को पढ़ रही है, पर उस मुस्कान के पीछे गहरा ग़ुस्सा है, क्योंकि यह मज़ाक उसकी सेहत, उसके बच्चों के भविष्य और उसके भरोसे के साथ हो रहा है।
हम चुप नहीं बैठेंगे। सदन से सड़क तक यह सवाल उठाते रहेंगे कि प्रदेश को अंधेर नगरी बनाने वालों से हिसाब कौन लेगा?
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MP Nursing Portal Scam: Certificate Issued to a "Donkey"
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Umang Singhar slams MP's nursing council after a certificate was issued to an applicant named "Donkey," questioning the state's verification system.