मास्टर प्लान 2047: सुकून खत्म, सांस कैसे लेगा भोपाल? 27% हरियाली के दावे सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी!
भविष्य के भोपाल की तस्वीर और हकीकत
लंबे इंतजार के बाद आखिरकार भोपाल का मास्टर प्लान सामने आ गया है। आपने और आपकी पार्टी ने भविष्य के भोपाल की जो तस्वीर पेश की, उससे ऐसा लगा मानो हमारी राजधानी का आने वाला कल विकास और निवास दोनों के लिहाज से बेहद शानदार होगा।
लेकिन, वातानुकूलित कमरों में बैठकर मास्टर प्लान तैयार करने वाले आपके अधिकारी शायद यह भूल गए कि भोपाल को 'फुर्सतियों का शहर' कहा जाता है और यहां मिलने वाले सुकून की मिसाल दी जाती है। नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को देखकर आज हर भोपाली अपना सिर खुजाने को मजबूर है कि आखिर वह 27 प्रतिशत हरियाली कहां से आएगी, जब पूरा भोपाल कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो चुका है।
हरियाली के दावे हवा-हवाई: आंकड़ों का छलावा
1995 के मास्टर प्लान में हरित क्षेत्र 16 प्रतिशत था, जिसे नए मास्टर प्लान में बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का दावा किया गया है। इसे देखकर पहली नजर में एक हरे-भरे और खूबसूरत भोपाल का सपना जरूर आंखों के सामने तैरने लगता है। लेकिन टाउन प्लानिंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हरियाली तो दूर, शहर के भीतर बच्चों और बुजुर्गों के खेलने व टहलने के लिए पार्कों की जगह कुल क्षेत्रफल का एक प्रतिशत भी नहीं बची है। 1 लाख हेक्टेयर से अधिक की इस योजना में पार्क क्षेत्र सिमटकर महज 0.66 प्रतिशत यानी 670.93 हेक्टेयर पर ही रह गया है।
अगर आंकड़ों की इस बाजीगरी को करीब से देखें, तो राजपत्र में प्रकाशित लैंड यूज कॉलम 14.2 के मुताबिक 27 प्रतिशत का यह आंकड़ा पूरे योजना क्षेत्र का नहीं, बल्कि सिर्फ 'भाग-अ' (61,017 हेक्टेयर) के दायरे पर आधारित है। यदि 1,09,690 हेक्टेयर के कुल योजना क्षेत्र के हिसाब से आकलन किया जाए, तो वास्तविक हरित क्षेत्र केवल 14.45 प्रतिशत और पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) को मिलाकर भी मात्र 16.22 प्रतिशत ही बैठता है।
जंगलों को बता दिया नया 'ग्रीन बेल्ट'!
सरकार ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए आंकड़ों का खेल कैसे खेला है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि योजना में कुल 14,698 हेक्टेयर ग्रीन बेल्ट दिखाया गया है। इसमें से अकेले 9,208 हेक्टेयर हिस्सा तो वह 'नगर वन' (G-5 श्रेणी) का है, जिस पर वन विभाग का स्वामित्व पहले से ही मौजूद है। इसके अलावा, भोजताल के प्रभाव क्षेत्र और अन्य जल निकायों के बफर जोन को भी ग्रीन एरिया में जोड़कर फर्जी आंकड़े खड़े कर दिए गए हैं।
प्रति व्यक्ति सिर्फ डेढ़ वर्ग मीटर खुला स्थान!
इस ड्राफ्ट में 45 लाख की अनुमानित आबादी के हिसाब से योजना बनाई गई है। इसके लिए मात्र 670.93 हेक्टेयर पार्क क्षेत्र तय करने का सीधा मतलब यह है कि एक नागरिक के हिस्से औसतन केवल डेढ़ वर्ग मीटर (1.5 sq.m.) पार्क आ रहा है, जो जमीन पर एक दरी बिछाने के लिए भी नाकाफी है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि घनी आबादी वाले सघन क्षेत्रों के लिए नए सेंट्रल या क्षेत्रीय पार्क का कोई प्रावधान ही नहीं किया गया है। इसके विपरीत, भानपुर जैसी जगहों को पार्क एरिया में रखकर वहां आम जनता की पहुंच से कोसों दूर 'गोल्फ कोर्स' बनाने की योजना पर काम चल रहा है।
मुख्यमंत्री जी से सीधा अनुरोध
माननीय मुख्यमंत्री जी, मेरा आपसे और आपके जिम्मेदार अधिकारियों से यह सीधा अनुरोध है कि कागजी आंकड़ों की बाजीगरी बंद कर पूरे योजना क्षेत्र के वास्तविक आंकड़े जनता के सामने रखे जाएं। ड्राफ्ट के इन तमाम विरोधाभासों को दूर किया जाए और गोल्फ कोर्स जैसी रईसों की परियोजनाओं के बजाय घनी आबादी वाले इलाकों में आम जनता, बच्चों और बुजुर्गों के लिए हरे-भरे पार्क मुहैया कराने की पुख्ता व्यवस्था की जाए।