ओबीसी आरक्षण: भाजपा की नीयत में खोट, युवाओं के भविष्य पर चोट
सेफ गेम खेल रही भाजपा
मध्यप्रदेश में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण के लिए भाजपा सेफ गेम खेल रही है। सांप भी मर जाए, लाठी भी न टूटे। मतलब आरक्षण भी न दे और नुकसान भी न उठाना पड़े। इसलिए मामला अदालतों और फाइलों में उलझा दिया है। जब भी सवाल पूछा जाता है, भाजपा जवाब देने की जगह कांग्रेस पर आरोप लगाने लगती है। मैं आज सीधा सवाल पूछना चाहता हूँ कि सात साल बीत गए, ओबीसी के युवाओं को उनका हक़ मिला क्यों नहीं?
फैसला हमने लिया, रोड़े किसने अटकाए?
साल 2019 में कांग्रेस की सरकार ने ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का ऐतिहासिक फैसला लिया था। यह किसी पर एहसान नहीं था, सामाजिक न्याय की दिशा में संविधान की भावना के अनुरूप उठाया गया कदम था। इसके बाद मामला अदालत पहुँचा।
पिछले कई वर्षों से प्रदेश में भाजपा की सरकार है। अदालत में पक्ष रखने की जिम्मेदारी, वकीलों की तैनाती, तथ्यों की प्रस्तुति, सब कुछ इसी सरकार के हाथ में रहा। फिर भी मामला सुलझा नहीं। तो आख़िर कमी कहाँ रही? पैरवी नहीं की गई और नीयत पहले से थी ही नहीं।
भाजपा का दोहरा चेहरा
भाजपा एक तरफ मंचों से ओबीसी हितैषी होने का दावा करती है, दूसरी तरफ उसकी सरकार 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर अदालत में ठोस और निर्णायक रुख़ नहीं दिखा पाती। जब कांग्रेस सवाल पूछती है तो भाजपा पिछली सरकार का फैसला और उसकी कानूनी प्रक्रिया गिनाने लगती है। पर सरकार किसकी है? जवाबदेही किसकी है? सात साल पुराने फैसले का हवाला देकर आप अपनी वर्तमान जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।
मुख्यमंत्री और भाजपा सरकार से सीधे सवाल
मैं मुख्यमंत्री और भाजपा सरकार से पूछता हूँ:
- 27 प्रतिशत आरक्षण को बचाने के लिए सरकार ने अब तक अदालत में क्या ठोस कदम उठाए?
- आगे की कानूनी लड़ाई की रणनीति और समयसीमा क्या है?
- अनिश्चितता के बीच ओबीसी वर्ग की भर्तियों और प्रवेश का क्या होगा?
- क्या सरकार इस विषय पर श्वेत पत्र जारी करेगी?
युवा भुगतते हैं, सरकार बयान देती है
ओबीसी युवा नौकरी के लिए आवेदन करता है, जब कोई छात्र उच्च शिक्षा में प्रवेश की तैयारी करता है, तब उसे नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप से कोई मदद नहीं मिलती।
उसे स्पष्ट नीति, कानूनी स्थिति और भविष्य का भरोसा चाहिए। आरक्षण की अनिश्चितता सीधे उसकी पढ़ाई, उसकी प्रतियोगी परीक्षा और उसके रोज़गार के सपनों को निगलती है। यह लाखों परिवारों की उम्मीदों का मामला है। और इन उम्मीदों के साथ खिलवाड़ की कीमत भाजपा को चुकानी पड़ेगी।
भाजपा न्याय के साथ नहीं है।