'युवा वर्ष' की कैसी तैयारी? जब प्रदेश में रिकॉर्ड तोड़ रही है बेरोजगारी!
कथनी बनाम करनी
हमारे देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में यह शाश्वत सत्य माना गया है कि 'कथनी से ज्यादा ताकतवर करनी होती है' और 'शब्दों से ज्यादा वजनदार कर्म होते हैं'। लेकिन मध्य प्रदेश और देश में भारतीय जनता पार्टी की 'डबल इंजन' सरकार के दौर में यह पुरानी और सच्ची कहावत पूरी तरह बेमानी हो चुकी है।
डंकापति का दौर, हकीकत कुछ और!
हमारा मध्य प्रदेश पिछले साढ़े बारह सालों से झूठी कामयाबी का ढोल पीटने और जनता के बीच खुद की पीठ थपथपाने वाली भाजपा सरकार से शासित है। चाहे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रहे हों या वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, दोनों की पुरानी आदत रही है कि भाषणों में जनता को सुनहरे सपने दिखाओ और एक झूठ को छिपाने के लिए सौ झूठ इतनी सफाई से बोलो कि जनता भ्रमित हो जाए।
इसकी बानगी हर उस नई योजना में दिखती है, जिसकी शुरुआत भाजपा सरकार बड़े गाजे-बाजे और विज्ञापनों के साथ करती है। कर्ज के बोझ तले दबे राज्य के खजाने को खाली किया जाता है, लेकिन नतीजा वही, 'ढाक के तीन पात'!
ताजा मामला वर्ष 2027 को 'युवा वर्ष' के तौर पर मनाने के शासकीय ऐलान से जुड़ा है।
17 लाख पंजीकृत बेरोजगार: 'युवा वर्ष' का जश्न किसके लिए?
माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी! एक कुशल और संवेदनशील शासक का यह फर्ज होता है कि वह राज्य के युवाओं की वास्तविक स्थिति को देखकर फैसले ले। लेकिन आपकी सरकार 'सब चंगा सी' दिखाने के फेर में खुद तो झूठ का लबादा ओढ़ लेती है और प्रदेश के युवाओं को अनिश्चितता के गहरे अंधेरे में धकेल देती है।
जब मुझे मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली कि सरकार वर्ष 2027 को 'युवा वर्ष' के रूप में मनाने जा रही है, तो बतौर नेता प्रतिपक्ष मुझे मध्य प्रदेश के युवाओं की विकराल बेरोजगारी देखकर यह फैसला पूरी तरह जनविरोधी और हास्यास्पद लगा।
बड़ा सवाल यह है:
- क्या प्रदेश के 17 लाख से अधिक पंजीकृत बेरोजगार युवाओं को 2027 में इवेंट्स के बीच 'आनंद' आएगा?
- इस साल के महज 10 महीनों में दर्ज हुए 6,59,098 नए बेरोजगार युवा खुद को कैसे समझाएंगे कि यह वर्ष उनके लिए मनाया जा रहा है?
- क्या 'युवा वर्ष' के नाम पर होने वाले तमाशों से बेरोजगारी के बादल छंट जाएंगे और नौकरियों की बारिश होने लगेगी?
वास्तविकता यह है कि सरकार युवाओं को स्थायी रोजगार देने के बजाय 'युवा वर्ष' के नाम पर करोड़ों रुपये इवेंट्स और आयोजनों में उड़ाकर युवाओं को उलझाए रखना चाहती है।
'रोजगार वर्ष' का सच: रिकॉर्ड बेरोजगारी और विदेश दौरे!
माननीय मुख्यमंत्री जी, आपने वर्ष 2025 को 'रोजगार और निवेश वर्ष' के रूप में घोषित किया था। उस वर्ष से मध्य प्रदेश के युवाओं को तो कोई रोजगार नहीं मिला, लेकिन हां, विदेश दौरों के मामले में आपने प्रधानमंत्री जी को भी पीछे छोड़ने की होड़ जरूर लगा ली!
अगले साल आपके साथ 'युवा वर्ष' मनाने को मजबूर युवाओं की तरफ से मेरा सीधा सवाल है:
- यदि 2025 'रोजगार वर्ष' था, तो रोजगार पोर्टल पर 25 लाख 95 हजार युवा क्यों दर्ज हुए?
- 'रोजगार वर्ष' का ढिंढोरा पीटने के बाद आपकी सरकार ने कुल कितने युवाओं को स्थायी सरकारी या निजी रोजगार दिया? इसका पारदर्शी डेटा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?
'आकांक्षी' शब्द: शब्दों की बाजीगरी, युवाओं के ज़ख्मों पर नमक!
आपकी सरकार किसी के जख्मों पर मरहम तो लगा नहीं पाती, लेकिन उस पर नमक छिड़कने में माहिर है। इसी 'काबिलियत' का परिचय देते हुए आपने बेरोजगारों को 'आकांक्षी युवा' का नया नाम दे दिया ताकि युवा आस लगाए बैठे रहें और सरकार से नौकरियां मांगने का सवाल ही बंद कर दें।
लेकिन मध्य प्रदेश का युवा आपकी इस भाषाई बाजीगरी में फंसने वाला नहीं है। 'माई यूथ, माई प्राइड' (My Youth, My Pride) और 'सीएम युवा संवाद' जैसे इवेंट्स केवल झुनझुना हैं। भूखे बिलखते बच्चे को झुनझुना थमाकर आप अपनी नाकामियों पर पर्दा नहीं डाल सकते।
जवाब तो देना पड़ेगा, मुख्यमंत्री जी!
बेरोजगारी आज के युवाओं के लिए सबसे बड़ा अभिशाप है। स्थायी रोजगार न दे पाने का जो कलंक आपकी सरकार पर लगा है, उसे विज्ञापनों और इवेंट्स की चमक-धमक से धोया नहीं जा सकता।
मध्य प्रदेश में 'युवा वर्ष' का ढोंग रचने से पहले मुख्यमंत्री जी को प्रदेश के युवाओं को यह स्पष्ट जवाब देना होगा कि लाखों की संख्या में कतार में खड़े इन युवाओं को स्थायी रोजगार कब और कैसे मिलेगा?