साहस और अनुशासन की मिसाल: कर्नल सोफिया कुरैशी
सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
भारतीय सेना में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इसमें एक नाम बहुत सम्मान से लिया जाता है — कर्नल सोफिया कुरैशी।
उन्होंने अपने काम, अनुशासन और अपने संयम से पूरे देश का दिल जीता है।
छात्रा से सेना की वर्दी तक का सफर
एक वैज्ञानिक सोच वाली छात्रा से सेना की वर्दी तक का उनका सफर आसान नहीं रहा। सोफिया कुरैशी ने बायोकेमिस्ट्री विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई में मेहनत और लगन ने उन्हें आगे बढ़ने का हौंसला दिया। यही हौंसला और हिम्मत बाद में उनके सैन्य जीवन में भी काम आया। आज वे देश को यह साबित करके दिखा रही हैं।
पहली भारतीय महिला अधिकारी जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय टुकड़ी की कमान संभाली
कर्नल कुरैशी भारतीय सेना की कोर ऑफ सिग्नल्स से जुड़ी हैं। साल 2016 में एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में टुकड़ी की कमान संभालने वाली वे पहली भारतीय महिला अधिकारी बनीं। उन्होंने पुणे में हुए बहुराष्ट्रीय अभ्यास "एक्सरसाइज फोर्स 18" में चालीस सदस्यों की भारतीय टुकड़ी का नेतृत्व भी किया।
यह उपलब्धि किसी भी महिला अधिकारी के लिए गर्व की बात है।
ऑपरेशन सिंदूर में देश के सामने आई पहचान
मई 2025 में जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया, तब कर्नल कुरैशी सेना की ओर से मीडिया को जानकारी देने वाली प्रमुख अधिकारियों में शामिल थीं। उनके सामने आने के तरीके में सधी हुई भाषा, स्पष्ट सोच और पूरा आत्मविश्वास दिखा। देश ने पहली बार उन्हें टीवी पर देखा और उनके अनुशासित व्यवहार का कायल हो गया।
संयमित व्यवहार, प्रचार से दूर
कर्नल कुरैशी का व्यवहार हमेशा संयमित और पेशेवर रहा है। वे बयानबाजी या विवाद में नहीं पड़तीं। उनका ध्यान सिर्फ अपने काम और जिम्मेदारी पर रहता है। सेना की वर्दी पहनने वाली किसी भी महिला के लिए यह गुण बहुत जरूरी होता है, और कुरैशी इसमें पूरी तरह खरी उतरती हैं। उनकी सोच में देश सेवा सबसे ऊपर है, न कि नाम या प्रचार।
विजय शाह विवाद और कर्नल कुरैशी का संयम
विजय शाह वाले विवाद में भी उनके संयम और अनुशासन ने देश को प्रभावित किया।
11 मई 2025 को मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने महू के एक कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में एक आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने सीधे नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा कर्नल कुरैशी की तरफ था। यह टिप्पणी सेना की एक वरिष्ठ महिला अधिकारी के सम्मान पर सीधा हमला थी। इस बयान से पूरे देश में गुस्सा फैल गया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और जांच के लिए SIT बनाई गई।
इस पूरे विवाद के दौरान कर्नल कुरैशी ने खुद कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया। उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया और अपने काम में जुटी रहीं। यह संयम ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
असली ताकत जवाबी बयानबाजी में नहीं, काम में है
विवादित बयान के बाद भी शांत बने रहना आसान नहीं होता। लेकिन कर्नल कुरैशी ने अपने संयम से यह साबित किया कि असली ताकत जवाबी बयानबाजी में नहीं, बल्कि अपने काम में होती है।
उन्होंने कभी खुद को पीड़ित बनाकर पेश नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने अपनी वर्दी और पद की गरिमा बनाए रखी।
लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा
मेरा ख्याल है - कर्नल सोफिया कुरैशी सैन्य अधिकारी ही नहीं, बल्कि लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा हैं। उनकी शिक्षा, उनका अनुशासन, उनका धैर्य और गरिमा - सब मिलकर ऐसी मिसाल बनाते हैं जिससे आने वाली पीढ़ियां सीख सकती हैं। समाज को ऐसी बेटियों पर गर्व होना चाहिए, जो कठिन हालात में भी अपने कर्तव्य और अपनी गरिमा से पीछे नहीं हटतीं।